रिपोर्ट -सर्वोत्तम तिवारी,
“भाजपा नेता ने भेजा UGC के नवीन एक्ट को लेकर उत्पन्न भ्रम पर प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, समान अवसर, सामाजिक समरसता और निष्पक्ष शिक्षा व्यवस्था की मांग”
कानपुर। उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू UGC के नवीन एक्ट को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में उत्पन्न हो रही भ्रांतियों, आशंकाओं एवं मानसिक असुरक्षा की भावना के समाधान हेतु भाजपा नेता व सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण कुमार शुक्ल द्वारा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र प्रेषित किया गया है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में समान अवसर, सामाजिक समरसता एवं योग्यता आधारित व्यवस्था को सुदृढ़ करने का उद्देश्य सर्वविदित है, किंतु UGC द्वारा हाल ही में लागू किए गए जाति-आधारित भेदभाव निरोधक प्रावधानों की भाषा एवं प्रक्रिया को लेकर छात्रों, अभिभावकों एवं शिक्षकों के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
प्रवीण कुमार शुक्ल ने कहा कि भेदभाव का विरोध सभी नागरिकों का साझा दायित्व है, किंतु वर्तमान स्वरूप में इस एक्ट के कुछ प्रावधान ऐसे प्रतीत होते हैं, जिनसे व्यवहार-आधारित निष्पक्षता के स्थान पर जातिगत पहचान को अधिक प्रमुखता मिलने की आशंका बन रही है। इससे शिक्षा परिसरों में समरसता के स्थान पर अविश्वास और मानसिक दबाव का वातावरण बनने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
श्री शुक्ल ने कहा कि वर्तमान समय में, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हम सब स्वयंसेवक देशभर में विराट हिन्दू सम्मेलन जैसे आयोजनों के माध्यम से “जात-पात की करो विदाई, हम सब हिन्दू भाई-भाई” का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचा रहे हैं, उसी समय इस प्रकार के प्रावधानों को लेकर संशय की स्थिति बनना सामाजिक एकता और समरसता के प्रयासों के विपरीत प्रतीत होता है।
उन्होंने ने विश्वास व्यक्त किया कि माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस विषय पर आवश्यक स्पष्टीकरण एवं संतुलित सुधार कर शिक्षा के वातावरण को भयमुक्त, विश्वासपूर्ण और राष्ट्र निर्माण के अनुरूप बनाए रखा जाएगा।












